ढाई सौ दलित हिंदू  बने मुस्लिम , न माया मिली न राम

ढाई सौ दलित हिंदू बने मुस्लिम , न माया मिली न राम

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नई दिल्ली , 10 अगस्त।  दिल्ली के जंतर -मंतर पर 3 साल के लम्बे संघर्ष के बाद आखिरकार ढाई सौ दलितो ने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया है।  ये परिवार है हरियाणा हिसार के  भगाना गांव के। जिनको आज दलित के नाम पर न माया मिली , न राम करे किस पर भरोसा। इन परिवारों की व्यथा ये है की दलित हिन्दू होने के कारण घरबार छूटा , अब मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद फिर गांव में घुसने के दरवाजे बंद हो गए है। पुलिस भी खाप पंचायत के फरमान पर चुप्पी मारे हुए है , गौरतलब है कि यहाँ के खाप पंचायत ने मुस्लिम के रूप में घर वापसी का जोरदार विरोध जताया है।      
 

आज ये दलित परिवार धर्म परिवर्तन के बाद सारे के सारे लोग घर वापस जाना चाहते हैं। अपने गांव में जाकर बसना चाहते हैं, लेकिन कैसे जाएं? गांव के दबंगों ने जीना मुहाल कर दिया है। जमीनें छीन लीं हैं। घरों के आगे दीवार खड़ी कर दी है। बहू-बेटियों की इजज्त से खेलने लगे और विरोध किया, तो गांव से ही बेदखल कर दिया। तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आखिरकार घर वापसी के लिए अपना धर्म ही बदल लिया।

जंतर-मंतर पर पिछले एक साल से आंदोलन पर बैठे सौ परिवारों ने अपना धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया है। हरियाणा के हिसार के भगाना गांव के लोग पिछले तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं। दो साल तक हिसार के लघु सचिवालय में अनशन पर बैठे।एक साल से दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठे थे। सोचा था जंतर मंतर से निकली आवाज को सरकार सुनेगी। उन्हें इंसाफ मिलेगा, लेकिन जब ये कोशिश भी नाकाम हुई तो आखिरकार अपना धर्म परिवर्तन ही कर लिया।

हरियाणा के हिसार के भगाना गांव के लोग हैं। दलित परिवारों के इन लोगों के साथ गांव के सवर्णौं ने अत्याचार किया। आरोप है कि इनकी जमीनें छीन लीं गई। सरकारी की ओर से प्लॉट मिले थे उनके पैसे ले लिए और प्लॉट भी नहीं दी और जब गांव के सवर्णों के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई तो गांववालों ने मिलकर इनका हुक्का पानी बंद कर दिया।

मजबूर होकर इन्होंने मई 2012 में अपना गांव छोड़ दिया। तब से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। तीन साल में हिसार के भगाना गांव में कई कांड हुए, जो दलित परिवार गांव में रह गए थे उनका जीना मुश्किल हो गया। आरोप है कि लगातार पुलिस प्रशासन से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हिसार की खाप पंचायत ने इनके खिलाफ फैसला दिया तो फिर उसके आगे बोलने की किसी में हिम्मत नहीं हुई।

दलितों के इस समूह ने हिसार से लेकर दिल्ली तक का दरवाजा खटखटाय़ा, नेता-मंत्री से लेकर अफसर तक हर किसी के पास गए, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई। उल्टे गांववालों ने इनपर झूठे मुकदमे लाद दिए। ये अपने गांव जा नहीं सकते और जंतर मंतर में एक साल के प्रदर्शन के बाद भी कुछ नहीं हुआ है।

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